(N/A) डाइहाइड्रोजन के थोक उत्पादन के लिए विद्युत अपघटनी विधि में निम्नलिखित प्रक्रियाएं शामिल हैं:
$(i)$ अम्लीकृत जल का विद्युत अपघटन: शुद्ध जल विद्युत का कुचालक होता है। इसलिए,इसे सुचालक बनाने के लिए इसमें अम्ल या क्षार की अल्प मात्रा मिलाई जाती है। प्लैटिनम इलेक्ट्रोड का उपयोग करके इस अम्लीकृत जल का विद्युत अपघटन करने पर कैथोड पर हाइड्रोजन प्राप्त होता है।
$2 H_2O_{(l)} \stackrel{\text{Electrolysis}}{\text{Traces of acid/base}} 2 H_{2_{(g)}} + O_{2_{(g)}}$
$(ii)$ बेरियम हाइड्रॉक्साइड के जलीय घोल का विद्युत अपघटन: निकल इलेक्ट्रोड के बीच बेरियम हाइड्रॉक्साइड के गर्म जलीय घोल का विद्युत अपघटन करके उच्च शुद्धता $(> 99.95 \%)$ वाला डाइहाइड्रोजन प्राप्त किया जाता है।
$(iii)$ ब्राइन का विद्युत अपघटन: ब्राइन घोल ($NaCl$ का घोल) के विद्युत अपघटन द्वारा सोडियम हाइड्रॉक्साइड और क्लोरीन के निर्माण में डाइहाइड्रोजन उप-उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है।
एनोड पर: $2 Cl_{(aq)}^{-} \longrightarrow Cl_{2_{(g)}} + 2 e^{-}$
कैथोड पर: $2 H_2O_{(l)} + 2 e^{-} \longrightarrow H_{2_{(g)}} + 2 OH_{(aq)}^{-}$
विद्युत अपघट्य की भूमिका: शुद्ध जल बहुत कम आयनीकरण के कारण विद्युत का कुचालक होता है। विद्युत अपघट्य (अम्ल,क्षार या लवण) घोल में आयनों की सांद्रता को बढ़ाता है,जिससे इसकी विद्युत चालकता बढ़ जाती है और विद्युत अपघटन प्रक्रिया के लिए आवश्यक विद्युत प्रवाह सुगम हो जाता है।